ऊंचे रिटर्न का लालच, मेहनत की कमाई लेकर फुर्र, ऐसी फ्रॉड कंपनियों से सावधान, जानें कैसे करती हैं काम

अक्सर जब आप सुबह उठकर अपना फ़ोन चेक करते हैं तो देखते हैं कि आपके मोबाइल नंबर को कई ग्रुप में जोड़ा गया है ये ग्रुप टेली मार्केटिंग और स्टॉक मार्केटिंग (Stock Market) से जुड़े होते हैं, जहां पैसे दोगुना करने का लालच दिया जाता है. और जैसे ही आप इनके जाल में फंसते है आपका मेहनत का पैसा लेकर ये फ्रॉड कंपनी (Fraud Company) गायब हो जाती है. ये फ्रॉड कंपनी चलती कैसे हैं? कैसे इस फ्रॉड कंपनी के ज़रिए आपसे लूटा गया पैसा चंद मिनटो में विदेश पहुंच जाता है, यहां जानिए

जैसे ना जाने कितने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप हैं जिनके ज़रिए देशभर के अलग-अलग शहरों में मौजूद लोगों को IPO और स्टॉक मार्केटिंग में इन्वेस्ट कर रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाया जाता है. लोगों की गाढ़ी मेहनत से कमाई रकम को कुछ ही हफ्तों में दोगुना से तीनगुना करने का वादा किया जाता है. जैसे ही लोग इनके झांसे में फंसते हैं उनके जीवन की गाढ़ी कमाई लेकर ये फ्रॉड कंपनी गायब हो जाती है.

मोबाइल सिम से कैसे होती है ठगी?

 सुनने में थोड़ा अटपटा लगेगा कि इस फ्रॉड कंपनी की नीव छोटे से मोबाइल सिम के आधार पर रखी जाती है. ये पूरा खुलासा केंद्रीय जांच एजेंसी ED ने अपनी मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत दर्ज एक चार्जशीट में किया है. जिसमें बताया गया कि जालसाजी का ये पूरा खेल भारत में फर्जी कागजातों के आधार पर हासिल किए गए मोबाइल सिम कार्ड के आधार पर विदेश में बैठकर खेला जाता है. जालसाजी के इस खेल  के आठ खिलाड़ी थे. 

  • फ्रॉड कंपनी का मास्टरमाइंड और डायरेक्टर शशि कुमार एम
  • फ्रॉड कंपनी का तथाकथित CA चरण राज सी
  •  धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे को विदेशों में ठिकाने लगाने का काम करने वाला तमिलासरण कुप्पन 
  •  फर्जी शेल कंपनियों में बतौर डायरेक्टर अपराध से अर्जित आय को विदेशों में इन्वेस्ट करने वाला अरविंदन आई
  •  24 शेल कंपनियों में से 5 का डायरेक्टर प्रकाश, जिसका काम फ्रॉड कंपनी के लिए कर्मचारियों को रिक्रूटमेंट करना था
  •  अपनी जालसाज कंपनी के लिए सिम कार्ड मुहैया करवाने और उन्हें विदेश भेजने वाला अजीत
  •  क्रिप्टो करेंसी के ज़रिए पैसा विदेश भेजना और उन्हें अलग अलग बैंको में ट्रांसफर करवाने वाला सचिन एम
  •  कर्मचारियों को लोगों को ठगने के लिए नई-नई स्कीम देने वाला किरण एस के 

फ्रॉड कंपनी का भंडाफोड़

 ED ने एक ऐसी ही फ्रॉड कंपनी का खुलासा किया जिसका एक साल में जालसाजी का टर्नओवर करीब 160 करोड़ रुपये है. पहले फर्जी कागजातों के आधार पर 24 शेल कंपनियां खोली गईं और फिर इनके ज़रिए मोबाइल सिम हासिल किए गए. फिर इन सिमों को विदेशों में भेजा गया,  जहां इन फ्रॉड कंपनी में काम करने वाले जालसाज कर्मचारियों ने मोबाइल पर ठगी का धंधा शुरू किया. भारतीय नागरिकों को जॉब ऑफर का लालच देकर गोल्डन ट्रायंगल (थाईलैंड, लाओस और म्यांमार) ले जाया जाता था, जहां उनसे साइबर ठगी करवाई जाती थी. इन्हीं शेल कंपनियों के नाम पर बैंक अकाउंट खोले गए. इन अकाउंट में धोखाधड़ी से कमाये गए करोड़ रुपये क्रिप्टो करेंसी के ज़रिए विदेशों में रूट किए गए . 

निवेश के नाम पर लूटी जा रही मेहनत की कमाई

ED की जांच में यह भी सामने आया कि ये "पिग-बुचरिंग" स्कैम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Facebook, Instagram, WhatsApp और Telegram के जरिए चलाए जा रहे थे. ऊंचे रिटर्न, IPO में स्पेशल कोटा के नाम पर विज्ञापन दिखाकर लोगों को फंसाया जा रहा था. निवेशकों को WhatsApp और Telegram ग्रुप जोड़ा जा रहा है, जहां फर्जी निवेशक पहले से होते थे, जो अपनी झूठी सक्सेस स्टोरी शेयर करते थे. निवेशकों को APK फाइल भेजकर फर्जी ऐप डाउनलोड करवाया जाता था, जिनमें असली शेयर बाजार की तरह दिखने वाले ऑप्शन होते थे. निवेशकों से बैंक खातों में पैसे जमा करवाए जाते थे, जो बाद में वापस नहीं मिलते. ठगी के पैसे को कई शेल कंपनियों के जरिए रूट कर आखिर में क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेज दिया जाता है. 

ईडी ने जांच में पाया कि 8 आरोपियों ने 24 फर्जी कंपनियों के जरिए करीब 160 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया. हाल ही में, ED ने जालसाजों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी कर डिजिटल डेटा और दस्तावेज जब्त किए और जालसाजी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया. 
 

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