CBSE Board Result: बच्चों की एंग्जायटी बढ़ा रही है रिजल्ट की टेंशन? डॉक्टर से जानें रिजल्ट से पहले कैसे कम करें बच्चों का स्ट्रेस
CBSE Board 10th 12th Result 2025: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ( Central Board of Secondary Education) यानी सीबीएसई बोर्ड के 10वीं और 12वीं के रिजल्ट जल्द ही सामने आ सकते हैं. पिछले साल सीबीएसई 10वीं के रिजल्ट 13 मई को जारी (CBSE Board Class 10th Result) हुए थे. ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि इस बार भी रिजल्ट का ऐलान मई के दूसरे हफ्ते तक कर दिया जाएगा. अब, जैसे-जैसे रिजल्ट का समय पास आ रहा है, वैसे-वैसे बच्चों में नर्वसनेस भी बढ़ रही है. कई बच्चे रिजल्ट को लेकर इतने ज्यादा स्ट्रेस (Exam Result Anxiety) में आ जाते हैं कि उनकी नींद, खानपान और मेंटल हेल्थ पर भी इसका असर नजर आने लगता है. वहीं, कुछ बच्चों में रिजल्ट को लेकर एंग्जायटी की परेशानी बढ़ने लगती है. अगर आपके बच्चे के साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा है, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है.
रिजल्ट से पहले बच्चों के इस स्ट्रेस को कैसे मैनेज किया जाए, इस समय बच्चों से क्या बात की जाए और उनका ख्याल कैसे रखा जाए, इसे लेकर हमने यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा के साइकेट्रिस्ट और मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट (Psychiatrist, Mental Health Expert) डॉ. मधुर राठी से बात की. NDTV के साथ हुई इस खास बातचीत के दौरान डॉ. ने कई जरूरी सवालों के जवाब दिए जो बच्चों में रिजल्ट की स्ट्रेस और एंग्जायटी को मैनेज करने में मदद कर सकते हैं. आइए एक नजर डालते हैं इनपर-
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सवाल नंबर 1- बच्चों में एंग्जायटी के लक्षण कैसे पहचानें?
जवाब- डॉ. मधुर राठी के मुताबिक, बच्चों में एंग्जायटी के लक्षण बड़ों से काफी अलग होते हैं. एंग्जायटी होने पर बच्चों में नींद नहीं आना, चिड़चिड़ापन, भूख नहीं लगना, पढ़ाई या किसी और काम में फोकस नहीं कर पाना, बॉडी पेन होना, पेट दर्द होना, सिर में दर्द होना, चक्कर आना, अचानक कमजोरी महूसस होना, किसी से मिलने का मन नहीं करना या छोटी-छोटी बातों पर रो देना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. अगर आपके बच्चे के साथ ऐसा कुछ हो रहा है, तो उसपर ध्यान दें.
सवाल नंबर 2- अगर बच्चा बहुत ज्यादा घबराया हुआ महसूस कर रहा है, तो तुरंत क्या करना चाहिए?
जवाब- अगर बच्चा ज्यादा घबराया हुआ है, तो उसे कुछ समय के लिए पढ़ाई से डिस्कनेक्ट कर बाहर घुमाने ले जाएं या उसे उसके दोस्तों के साथ खेलने दें, बच्चे को दूसरी एक्टिविटी में एंगेज करें. अगर बच्चा सोना चाहता है, तो उसे कुछ देर सोने दें. वहीं, अगर इन सब से भी काम न बने और बच्चा ज्यादा ही परेशान हो, ठीक तरह बात तक नहीं कर पा रहा हो, तो इस कंडीशन में किसी काउंसलर या साइकेट्रिस्ट से बात करना जरूरी हो जाता है.
सवाल नंबर 3- अगर बच्चे को एंग्जायटी अटैक आ जाए तो उसे कैसे संभालें?
जवाब- डॉ. मधुर राठी के मुताबिक, अगर बच्चे को एंग्जायटी अटैक आए, तो बिना देरी किए उसे किसी साइकेट्रिस्ट या साइकोलॉजिस्ट के पास लेकर जाएं. बच्चों को एंग्जायटी अटैक आने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. कई बार केवल रिजल्ट ही कारण नहीं होता है, इससे अलग बच्चा फैमली को लेकर या स्कूल में किसी बात को लेकर परेशान हो सकता है, जिसे लेकर वो खुलकर बात नहीं कर पाता है. कई बार मां-बाप इन बातों को नहीं समझ पाते हैं, ऐसे में प्रोफेशनल की मदद लेना जरूरी हो जाता है.
सवाल नंबर 4- क्या किसी खास डाइट या लाइफस्टाइल चेंज से एंग्जायटी कम की जा सकती है?
जवाब- इस तरह की कंडीशन में डॉ. मधुर राठी डाइट में कोई खास बदलाव नहीं करने की सलाह देते हैं. यानी आप अपने बच्चे को पहले की तरह ही हेल्दी चीजें खाने-पीने के लिए दे सकते हैं. इससे अलग आप उनकी लाइफस्टाइल में कुछ जरूरी बदलाव कर सकते हैं. जैसे रिजल्ट आने से पहले बच्चों के पास काफी समय होता है. इस समय आप उन्हें कोई स्विमिंग क्लास, डांस क्लास, योगा या कोई भी स्पोर्ट ज्वाइन करा सकते हैं. इससे न केवल आपका बच्चा फिजकली फिट होगा, बल्कि इस तरह की एक्टिविटी में बच्चा चीजों को ज्यादा बेहतर तरीके से समझता है. वो बार-बार हार को देखता है और हर बार उस हार को जीत में बदलने की कोशिश करता है. फिर यही फॉर्मूला वो अपनी पढ़ाई में भी लगाता है.
सवाल नंबर 5- क्या मोबाइल और सोशल मीडिया का रिजल्ट स्ट्रेस से कोई संबंध है? अगर हां, तो इसे कैसे मैनेज किया जाए?
जवाब- मोबाइल और सोशल मीडिया का बच्चों और रिजल्ट की स्ट्रेस पर सीधा असर पड़ता है. सोशल मीडिया पर हर समय वो दूसरे लोगों को बेहतर करते हुए देखता है या कॉम्पिटिशन ज्यादा महसूस करता है, तो कई बार इससे बच्चा खुद को पीछे फील करने लगता है. इससे उसपर प्रेशर ज्यादा बढ़ जाता है, जो भी एंग्जायटी का कारण बन सकता है. इसे मैनेज करने के लिए अपने बच्चों से बात करें. उन्हें बताएं कि हमारे हाथ में केवल मेहनत करना है, आप मेहनत करें. कई बार चीजें हमारे हाथ में नहीं होती हैं. चीजों से सीखकर और बेहतर करने की कोशिश करें.
सवाल नंबर 6- अगर बच्चा रिजल्ट के बाद निराश या डिप्रेस महसूस करे तो क्या किया जाए?
जवाब- डॉ. राठी बताते हैं, अगर बच्चा खुद को बहुत थका हुआ फील कर रहा है, बात-बात पर रो देता है, खुलकर बात नहीं कर रहा है या चुप-चुप रहने लगा है, तो पहले मां-बाप उससे बात करें. उसे समझाएं कि एक रिजल्ट उसका भविष्य तय नहीं करेगा. आगे मेहनत करने पर वो और बेहतर परिणाम ला सकता है. हालांकि, अगर इससे काम न बने या बच्चे के मन में गलत ख्याल आने लगें तो इस स्थिति में भी प्रोफेशनल की मदद लेना जरूरी है.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
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