चैत्र नवरात्रि की नवमी कल, जानें मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा
Chaitra Navratri 2025 Day 9: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है. वैदिक पांचांग के अनुसार, आज यानी 5 अप्रैल की रात 7 बजकर 25 मिनट से नवमी तिथि आरंभ हो रही है, इसका समापन 6 अप्रैल की रात 07 बजकर 21 मिनट पर होगा. ऐसे में 6 अप्रैल 2025 को रामनवमी मनाई जाएगी. आप इस तिथि पर कन्या पूजन के साथ-साथ अपने व्रत का पारण भी कर सकते हैं. नवमी तिथि पर मां दुर्गा के नौवें और अंतिम स्परूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है. मां सिद्धिदात्री का स्वरूप अत्यंत दिव्य और सुशोभित होता है. उनके चार हाथ होते हैं, जिसमें एक हाथ में शंख, दूसरे हाथ में चक्र, तीसरे हाथ में गदा और चौथे हाथ में कमल का फूल होता है. मां का वाहन सिंह है और वे कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं. मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियों, भौतिक सुख-संपत्ति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए उपदेश देती हैं. आइए जानते हैं मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, भोग, मंत्र, शुभ रंग और कथा.
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि (Maa Siddhidatri Puja Vidhi)
- नवमी के दिन, सबसे पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें और घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें.
- एक साफ आसन पर बैठकर मां सिद्धिदात्री की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें.
- दीपक, अगरबत्ती और पुष्प अर्पित करके मां को मन से प्रणाम करें.
- इसके बाद मां सिद्धिदात्री को भोग लगाएं.
- मां सिद्धिदात्री के मंत्रों का जाप करें और उन पर श्रद्धा भाव से ध्यान केंद्रित करें.
- अंत में मां की आरती उतारें और परिवार में मां का प्रसाद बाटें.
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मां सिद्धिदात्री का मंत्र (Maa Siddhidatri Mantra)
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
बीज मंत्र
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
मां सिद्धिदात्री का भोग (Maa Siddhidatri ka bhog)
मां सिद्धिदात्री को तिल और मेवे से बने व्यंजनों का भोग लगाना शुभ माना जाता है.
मां सिद्धिदात्री शुभ रंग (Maa Siddhidatri ka Shubh Rang)
नवरात्रि की नवमी तिथि को बैंगनी या जामुनी रंग पहनना शुभ होता है.
मां सिद्धिदात्री की कथा (Maa Siddhidatri ki Katha)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब असुरों के अत्याचार से देवता परेशान हो गए, तब उन्होंने भगवान शिव और विष्णु से मदद मांगी. देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा गया. भगवान शंकर ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही सिद्धियों को प्राप्त किया था. सिद्धिदात्री देवी की कृपा से शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था. इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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