बंगाल में रामनवमी के जुलूस पर क्यों कोहराम, किसकी भली करेंगे राम!
पश्चिम बंगाल में राम नवमी के जुलूस को लेकर राजनीतिक (Bengal Ramnavmi Procession Politics) गरम है. टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने हैं. अदालत ने 6 अप्रैल को जुलूस निकालने की परमिशन (Bengal Ramnavmi Procession) दे दी है. बीजेपी समेत कई हिंदू संगठन जुलूस निकालने के लिए तैयार हैं. अब टीएमसी भी जुलूस निकालने जा रही है. डर बस यही है कि हालात बिगड़ें ना. हालांकि बंगाल सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है.
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टीएमसी विधायक शौकत मोल्लाह ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस कैनिंग में होने वाली रामनवमी की विशाल रैली में शामिल होगी. जुलूस के आयोजक ने उनको भी न्योता दिया है. इसके साथ ही उन्होंने भड़काऊ माहौल बनाने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया. टीएमसी विधायक ने कहा कि बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार, सुवेंदु अधिकारी और दिलीप घोष धर्म का राजनीतिकरण कर रहे हैं.
रामनवमी जुलूस पर बीजेपी-टीएमसी आमने-सामने
वहीं बीजेपी नेता दिलीप घोष ने सवाल उठाया कि पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में हिंदू त्योहारों के दौरान समस्याएं क्यों पैदा होती हैं? ममता सरकार और पुलिस हिंदू त्योहारों को रोकने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाती है. कहते हैं कि अगर कोई गड़बड़ी होती है, तो जुलूस की इजाजत नहीं दी जाएगी, लेकिन गड़बड़ी आप ही पैदा करते हैं. वे बहाने लेकर कोर्ट में जाते हैं. उन्हें बहाना बंद कर देना चाहिए. क्यों कि हिंदू समाज कानून के दायरे में रहकर ही अपने कार्यक्रम का आयोजन करता है.
बंगाल में भव्य होगा रामनवमी का जुलूस
बंगाल में इस बार राम नवमी का जुलूस कितना भव्य होगा इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि शोभायात्रा के लिए ढाई हजार से ज्यादा आवेदन दिए गए हैं. 60 शोभायात्राएं तो अकेले कोलकाता में ही निकालने की तैयारी हो रही है, जिनमें 41 को इजाजत मिल गई है.
वीएचपी समेत कई हिंदू संगठनों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में रामनवमी पर 2,000 से ज्यादा रैलियां निकाली जाएंगी. वहीं 200 झांकियां और 5000 जगहों पर राम महोत्सव आयोजित होंगे. बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी का दावा है कि रामनवमी की रैलियों में पूरे राज्य में करीब 1.5 करोड़ हिंदू हिस्सा लेंगे. इन शर्तों के साथ रामनवमी जुलूस की इजाजत
कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल में हिंदू संगठनों को कुछ शर्तों के साथ रामनवमी का जुलूस निकालने की अनुमति दी है. जुलूस में हथियार ले जाने की अनुमति नहीं है. साथ ही, जुलूस में शामिल होने वालों को पुलिस और प्रशासन के पास अपना पहचान पत्र जमा करना होगा. इन शर्तों के साथ हाई कोर्ट ने हावड़ा में अंजनी पुत्र सेना और विश्व हिंदू परिषद के रामनवमी जुलूस को अनुमति दी है. अंजनी पुत्र सेना और विश्व हिंदू परिषद को सुरक्षा के लिहाज से अलग-अलग समय पर जुलूस निकालने की परमिशन दी गई है. इसके साथ ही, जुलूस में लोगों की संख्या को भी सीमित कर दिया गया है.
'राम' पर कैसे बढ़ा बवाल?
पूरा बवाल टीएमसी विधायक मदन मित्रा के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर कोई रामनवमी के दिन तनाव पैदा करने की कोशिश करेगा, तो वह पिटे बिना घर नहीं लौट पाएगा. अपनी ताकत दिखाने के लिए रामनवमी का दिन न चुनें. बस फिर क्या था बीजेपी नेता दिलीप घोष ने पलटवार कर कहा कि पहले टीएमसी नेता सीधे खड़े होना सीखें, फिर चुनौती दें.
रामनवमी पर बंगाल में हाई अलर्ट
कोलकाता हाई कोर्ट का जुलूस को परमिशन देना ममता सरकार के लिए किसी झटके से कम नहीं है. हालांकि अब जब जुलूस निकलेगा ही तो कोई अप्रिय घटना न घटे ये देखना सरकार की जिम्मेदारी होगी. यही वजह है कि पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था सख्त की जा रही है. संवेदनशील इलाकों में 29 IPS अफसरों की तैनाती की गई है. अकेले कोलकाता में 5 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती का आदेश दिया गया है.
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